तीन बच्चों, पत्नी और एक बहन का छिना सहारा, मचा कोहराम
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असगर नकी
सुल्तानपुर । गुर्बत सही मगर हँसता हुआ जुनेद अहमद का परिवार पल भर में बिखर गया, मंगलवार का दिन सबीना बानों के लिये काला दिन बनकर आया, जिसने सबीना का न सिर्फ सुहाग छीना बल्कि तीन बच्चों सोह्बान 12, सुबहान 11 और सामून 6 के सर से बाप का साया, जबकि मां-बाप के गुज़र जाने के बाद बहन अंजुम के लिये इकलौता भाई जुनेद मायके में अकेला चिराग था जो बुझ गया, जबकि मोहल्ले की गलियां जुनेद की मौत से सूनी हो गई।
मज़हबी तालीम याफ्ता जुनेद अहमद हर दिन साइकिल पर सवार होकर डिहवा कोतवाली नगर से तक़रीबन 15 किलोमीटर मामपुर का सफर साइकिल से तय करते थे, ये रोज़ का दस्तूर था, जुनेद इतनी मशक्कत करके कमाते भी थे तो महज़ 1200रूपये महीने, दिहाडी मज़दूर से कम तनख्वाह पर भी वो बच्चों को मज़हबी तालीम देने मदरसे जाते थे, ये रक़म और कुछ तक़रीर आदि से आई रक़म के ज़रिये तीन बच्चों और खुद व बीवी का वो ख़र्च पूरा करते थे, इस हकीक़त की कहानी तो जुनेद के घर का ढांचा ही बया कर रहा है लेकिन जुनेद की निगाह में घर से जादा तालीम की अहमियत थी, तभी तो दो बच्चे गोपाल पब्लिक स्कूल में कक्षा 6 और 7 में और छोटा बच्चा गुरुनानक स्कूल मे कक्षा 2 में पढ़ रहा।
सुल्तानपुर । गुर्बत सही मगर हँसता हुआ जुनेद अहमद का परिवार पल भर में बिखर गया, मंगलवार का दिन सबीना बानों के लिये काला दिन बनकर आया, जिसने सबीना का न सिर्फ सुहाग छीना बल्कि तीन बच्चों सोह्बान 12, सुबहान 11 और सामून 6 के सर से बाप का साया, जबकि मां-बाप के गुज़र जाने के बाद बहन अंजुम के लिये इकलौता भाई जुनेद मायके में अकेला चिराग था जो बुझ गया, जबकि मोहल्ले की गलियां जुनेद की मौत से सूनी हो गई।
मज़हबी तालीम याफ्ता जुनेद अहमद हर दिन साइकिल पर सवार होकर डिहवा कोतवाली नगर से तक़रीबन 15 किलोमीटर मामपुर का सफर साइकिल से तय करते थे, ये रोज़ का दस्तूर था, जुनेद इतनी मशक्कत करके कमाते भी थे तो महज़ 1200रूपये महीने, दिहाडी मज़दूर से कम तनख्वाह पर भी वो बच्चों को मज़हबी तालीम देने मदरसे जाते थे, ये रक़म और कुछ तक़रीर आदि से आई रक़म के ज़रिये तीन बच्चों और खुद व बीवी का वो ख़र्च पूरा करते थे, इस हकीक़त की कहानी तो जुनेद के घर का ढांचा ही बया कर रहा है लेकिन जुनेद की निगाह में घर से जादा तालीम की अहमियत थी, तभी तो दो बच्चे गोपाल पब्लिक स्कूल में कक्षा 6 और 7 में और छोटा बच्चा गुरुनानक स्कूल मे कक्षा 2 में पढ़ रहा।
रोज़ की तरह आज भी जुनेद सुबह क़रीब 6 बजे घर से मदरसे के लिये निकले जिन्हें पत्नी सबीना ने विदा किया पर सबीना या किसी को क्या पता था कि दो घंटे के बाद ये ख़बर आयेगी कि जुनेद नहर में डूब कर "काल के गाल में समा गये"
लेकिन होनी को कौन टाल सकता है? अकसर नहर के पास रुकने वाले जुनेद मंगलवार को भी उसी नहर के पास रुके, लेकिन किसी कारण से जुनेद का पांव फिसल गया और उफ्नाई हुई नहर में देखते ही देखते जुनेद डूब गये, गांव के दर्जन भर से जादा लोगों ने नहर मे रस्सा-बांस लगाकर ढूढने की कोशिश भी कि जो कामयाब नही हुई,उधर प्रशासन ने सिचाई विभाग के उच्च अधिकारियो को पानी कम करने का निर्देश दिया पानी कम भी हुआ लेकिन जुनेद का कोई पता नही चला, गाव के चार गोताखोर और चार बाहरी गोताखोर बुलाये गये आठ गोताखोरो ने मिलकर जुनेद की लाश ढूँढ़ने का प्रयास किया लेकिन ख़बर लिखे जाने तक कोई कामयाबी नही मिल सकी है, उधर गुस्साए ग्रामीणों ने रायबरेली राजमार्ग जाम कर दिया है, जबकि जुनेद की बेवा का रो-रो कर बुरा हाल है।
हां मौके पर पहुंचे पूर्व लोकसभा प्रत्याशी शकील अहमद, सपा नेत मेराज अहमद खान , प्राथमिक शिक्षक संघ प्रवक्ता निजाम खान, कामरान, सूफी, बसपा नेता निसार अहमद उर्फ गुड्डू आदि ने गुस्साए ग्रामीणों को समझाया बुझाया और पीडित के घर वालों कॊ मदद की बात कही।


