जैन मुनि एवं माताजी के चौमासे का भव्य आयोजन
https://husainijnp.blogspot.com/2016/07/blog-post_890.html
बाराबंकी। एक लम्बे समय से ही देश के लगभग सभी शहरों मे जैन समाज ने अपने
व्यापारिक बुद्धि कौशल से देश की अर्थव्यवस्था में अपना बहुमूल्य योगदान
दिया है। स्वभाव से बेहद शान्तिपूर्ण एवं धार्मिक जैन समाज आज जिला
बाराबंकी का भी एक बेहद महत्वपूर्ण एवं अटूट अंग है। सावन मास का विशेष
अवसर जैन धर्म में भी अत्यन्त महत्वपूर्ण माना जाता है।इसी को देखते हुए
शहर में स्थित बडे़ जैन मन्दिर में जैन मुनि आचार्य 108 सुन्दर सागर जी
एवं गणिनी आर्यिका 105 विमल प्रभा जी के चौमासे का विशाल एवं भव्य आयोजन
किया गया। साथ ही दिन में एक बजे महाराज जी एवं माताजी के प्रवचनों का
आयोजन भी नयी जैन धर्मशाला में आयोजित किया गया जिसमें बडी संख्या में
जैन समाज के लोगों ने हिस्सा लिया।सभी सन्तगण विशाल संघ 19 पिच्छीधारी
साधुओं से है जो इनके साथ जैन मन्दिर में उपस्थित हैं। सभी सन्तगण
चातुर्मास हेतु बाराबंकी में पधारे है और अपने पवित्र चरणों से इस जिले
की भूमि को धन्य करते हुए गौरान्वित किया है।इसी उपलक्ष्य में कल विशाल
संघ 19 पिच्छीधारी संघ के साधु सन्तो का बाराबंकी में जब आगमन हुआ तो
उनका जगह जगह पर भव्य स्वागत पूरे बाजे गाजे के साथ हुआ और एक जुलूस के
रूप में जैन श्रद्धालु नाचते गाते और जयकारा लगाते हुए जैन मन्दिर लेकर
आये।
व्यापारिक बुद्धि कौशल से देश की अर्थव्यवस्था में अपना बहुमूल्य योगदान
दिया है। स्वभाव से बेहद शान्तिपूर्ण एवं धार्मिक जैन समाज आज जिला
बाराबंकी का भी एक बेहद महत्वपूर्ण एवं अटूट अंग है। सावन मास का विशेष
अवसर जैन धर्म में भी अत्यन्त महत्वपूर्ण माना जाता है।इसी को देखते हुए
शहर में स्थित बडे़ जैन मन्दिर में जैन मुनि आचार्य 108 सुन्दर सागर जी
एवं गणिनी आर्यिका 105 विमल प्रभा जी के चौमासे का विशाल एवं भव्य आयोजन
किया गया। साथ ही दिन में एक बजे महाराज जी एवं माताजी के प्रवचनों का
आयोजन भी नयी जैन धर्मशाला में आयोजित किया गया जिसमें बडी संख्या में
जैन समाज के लोगों ने हिस्सा लिया।सभी सन्तगण विशाल संघ 19 पिच्छीधारी
साधुओं से है जो इनके साथ जैन मन्दिर में उपस्थित हैं। सभी सन्तगण
चातुर्मास हेतु बाराबंकी में पधारे है और अपने पवित्र चरणों से इस जिले
की भूमि को धन्य करते हुए गौरान्वित किया है।इसी उपलक्ष्य में कल विशाल
संघ 19 पिच्छीधारी संघ के साधु सन्तो का बाराबंकी में जब आगमन हुआ तो
उनका जगह जगह पर भव्य स्वागत पूरे बाजे गाजे के साथ हुआ और एक जुलूस के
रूप में जैन श्रद्धालु नाचते गाते और जयकारा लगाते हुए जैन मन्दिर लेकर
आये।

