भू-जल सप्ताह में बोले मुख्य विकास अधिकारी
https://husainijnp.blogspot.com/2016/07/blog-post_919.html
बाराबंकी। जल ही जीवन का श्रोत है। हमें आगामी पीढ़ी के लिए अपने बच्चों
के जीवन के लिए इसका संरक्षण करना ही है। पृथ्वी का लगभग 71 प्रतिशत भाग
पानी है, लेकिन पीने का पानी हमें मात्र भूगर्भ स्त्रोत तथा ग्लेशियर के
पिघलने से ही उपलब्ध होता है। पानी की बचत के लिए हमें पेयजल की भयावह
कमी से गुजर रहे देशों से सीख लेनी चाहिए। हमें गम्भीरता से स्वच्छ जल का
संचयन और संरक्षण करना है। उक्त उद्गार मुख्य विकास अधिकारी ़ऋषिरेन्द्र
कुमार ने आज विकास भवन के गांधी सभागार में आयोजित भूजल सप्ताह के समापन
समारोह में व्यक्त किये। उन्होने बताया सरकार के आदेशानुसार जनपद में 16
से 22 जुलाई तक भूजल सप्ताह मनाया गया तथा तहसील स्तर तक जाकर जल संचयन
एवं जल संरक्षण की जानकारी प्रदान की गयी। जनपद के भूगर्भ जल की स्थिति
के बारे में जानकारी देते हुए उन्होने बताया कि दो नदियों के संयोग के
कारण बाराबंकी में भूगर्भ जल की स्थित अच्छी है। हमारे जनपद में उ.प्र.
सरकार की वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ो के अनुसार मात्र दो ब्लाक हैदरगढ़ और
बंकी ही ऐसे है जहॉ भूगर्भ जल की गिरावट सामान्य से अधिक है। उन्होने कहा
आज देश की बढ़ती आबादी, उद्योगों की भरी आवश्यकता, उत्पादन केन्द्रों तथा
कृषि आदि मंे जल की भारी खपत हो रही है और भूगर्भ जल के स्तर में निरन्तर
गिरवाट आ रही है, जिसको दृष्टिगत रखकर सरकार द्वारा मनाये जा रहे भूजल
सप्ताह का बाराबंकी में विविध विभागों के सहयोग से तहसील से लेकर गांवो
तक प्रचार किया गया। इस अवसर पर सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियन्ता ने नहर
के जल के बराबर एवं सम्यक उपयोग हेतु जल के बंटवारे की व्यवस्था से अवगत
कराते हुए बताया गया कि गंावो में जल संचयन हेतु ‘‘खेत का पानी खेत में
गांव का पानी गांव में’’ की व्यवस्था करते हुए भूजल रीचार्ज और तथा वाटर
लॉगिंग से भी बचने के लिए व्यापक प्रचार किया गया है। अधिशासी अभियन्ता
जल निगम ने भी घरों में व्यर्थ जल न बहाने की अपील की जानकारी दी। जिससे
पेयजल छतों पर बहकर व्यर्थ न हो। बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा अवगत कराया
गया कि विद्यालयों में जल बचाने की सिर्फ जानकारी ही नहीं दी गयी अपितु
मौके पर जाकर खुली हुयी टोंटियो को बंद भी कराया गया, जिससे पेयजल व्यर्थ
न हो। उन्होने बताया कि इस सप्ताह विद्यालयों में विविध प्रतियोगिताएं
तथा वाद-विवाद कराकर जल संरक्षण एवं जल संचयन की जानकारी दी गयी। लघु
सिंचाई विभाग, जनपद द्वारा आयोजित भूजल सप्ताह के समापन समारोह में मुख्य
अतिथि जनपद के मुख्य विकास अधिकारी ऋषिरेन्द्र कुमार थे तथा अधिशासी
अभियन्ता जल निगम, अधिशासी अभियन्ता नलकूप, अधिशासी अभियन्ता सिंचाई
विभाग, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, जिला विद्यालय निरीक्षक, भूमि संरक्षण
अधिकारी, अधिशासी अभियन्ता भूगर्भ जल विभाग सहित समस्त सम्बन्धित अधिकारी
समारोह में उपस्थित थे। समारोह में उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मचारियों
को जल संरक्षण एवं जल संचयन की जानकारी प्रदान करने वाले पैम्फलेट्स तथा
प्रचार साहित्य भी वितरित किया गया है।
के जीवन के लिए इसका संरक्षण करना ही है। पृथ्वी का लगभग 71 प्रतिशत भाग
पानी है, लेकिन पीने का पानी हमें मात्र भूगर्भ स्त्रोत तथा ग्लेशियर के
पिघलने से ही उपलब्ध होता है। पानी की बचत के लिए हमें पेयजल की भयावह
कमी से गुजर रहे देशों से सीख लेनी चाहिए। हमें गम्भीरता से स्वच्छ जल का
संचयन और संरक्षण करना है। उक्त उद्गार मुख्य विकास अधिकारी ़ऋषिरेन्द्र
कुमार ने आज विकास भवन के गांधी सभागार में आयोजित भूजल सप्ताह के समापन
समारोह में व्यक्त किये। उन्होने बताया सरकार के आदेशानुसार जनपद में 16
से 22 जुलाई तक भूजल सप्ताह मनाया गया तथा तहसील स्तर तक जाकर जल संचयन
एवं जल संरक्षण की जानकारी प्रदान की गयी। जनपद के भूगर्भ जल की स्थिति
के बारे में जानकारी देते हुए उन्होने बताया कि दो नदियों के संयोग के
कारण बाराबंकी में भूगर्भ जल की स्थित अच्छी है। हमारे जनपद में उ.प्र.
सरकार की वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ो के अनुसार मात्र दो ब्लाक हैदरगढ़ और
बंकी ही ऐसे है जहॉ भूगर्भ जल की गिरावट सामान्य से अधिक है। उन्होने कहा
आज देश की बढ़ती आबादी, उद्योगों की भरी आवश्यकता, उत्पादन केन्द्रों तथा
कृषि आदि मंे जल की भारी खपत हो रही है और भूगर्भ जल के स्तर में निरन्तर
गिरवाट आ रही है, जिसको दृष्टिगत रखकर सरकार द्वारा मनाये जा रहे भूजल
सप्ताह का बाराबंकी में विविध विभागों के सहयोग से तहसील से लेकर गांवो
तक प्रचार किया गया। इस अवसर पर सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियन्ता ने नहर
के जल के बराबर एवं सम्यक उपयोग हेतु जल के बंटवारे की व्यवस्था से अवगत
कराते हुए बताया गया कि गंावो में जल संचयन हेतु ‘‘खेत का पानी खेत में
गांव का पानी गांव में’’ की व्यवस्था करते हुए भूजल रीचार्ज और तथा वाटर
लॉगिंग से भी बचने के लिए व्यापक प्रचार किया गया है। अधिशासी अभियन्ता
जल निगम ने भी घरों में व्यर्थ जल न बहाने की अपील की जानकारी दी। जिससे
पेयजल छतों पर बहकर व्यर्थ न हो। बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा अवगत कराया
गया कि विद्यालयों में जल बचाने की सिर्फ जानकारी ही नहीं दी गयी अपितु
मौके पर जाकर खुली हुयी टोंटियो को बंद भी कराया गया, जिससे पेयजल व्यर्थ
न हो। उन्होने बताया कि इस सप्ताह विद्यालयों में विविध प्रतियोगिताएं
तथा वाद-विवाद कराकर जल संरक्षण एवं जल संचयन की जानकारी दी गयी। लघु
सिंचाई विभाग, जनपद द्वारा आयोजित भूजल सप्ताह के समापन समारोह में मुख्य
अतिथि जनपद के मुख्य विकास अधिकारी ऋषिरेन्द्र कुमार थे तथा अधिशासी
अभियन्ता जल निगम, अधिशासी अभियन्ता नलकूप, अधिशासी अभियन्ता सिंचाई
विभाग, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, जिला विद्यालय निरीक्षक, भूमि संरक्षण
अधिकारी, अधिशासी अभियन्ता भूगर्भ जल विभाग सहित समस्त सम्बन्धित अधिकारी
समारोह में उपस्थित थे। समारोह में उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मचारियों
को जल संरक्षण एवं जल संचयन की जानकारी प्रदान करने वाले पैम्फलेट्स तथा
प्रचार साहित्य भी वितरित किया गया है।

