बिना मान्यता के चल रहे हरख क्षेत्र में दर्जनों विद्यालय
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जैदपुर, बाराबंकी। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के संरक्षण में हरख विकास
खण्ड में बिना मान्यता के ही दर्जनो विद्यालय अवैध रुप से चल रहे हैं। एक
तरफ जहां इन विद्यालयों के संचालनकर्ता ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों का
शोषण कर रहे हैं। दूसरी तरफ सब कुछ जानने के बाद भी शिक्षा विभाग के
अधिकारी कोई भी कार्यवाही नही कर रहे हैं। क्षेत्रीय ग्रामीणों ने प्रदेश
के शिक्षा मंत्री को पत्र भेजकर अवैध विद्यालयों के विरुद्ध कार्यवाही की
मांग की है। जानकारी के अनुसार, जैदपुर कस्बे सहित ग्रामीण क्षेत्रों में
मान्टेसरी स्कूलों का कारोबार दिन पर दिन फल फूल रहा है और बुलन्द हौसले
वाले संचालक की कमाई का बेहतरीन जरिया बना हुआ है। कक्षा 5 की मान्यता
लेकर कक्षा 8 से अधिक तक शिक्षा देने का कार्य पुराना हो चुका है। कुछ
एैसे भी स्कूल हैं जो कक्षा 1 की मान्यता भी नही है लेकिन कक्षा 8 तक
स्कूल चला रहे है। सुविधा के नाम पर लोगों से हजारों रूपये वसूला जा रहा
है। जबकि कोर्स बेचने व खरीदवाने की बात ही निराली है। कोई कमीशन को लेकर
दुकानदारों से वसूली कर रहा है। तो कोई स्वयं अपने ही स्कूल में किताबे
बेचकर अपनी जेबें भर कर गरीबों की जेब खाली करने पर उतारू है। तरह-तरह का
प्रचार प्रसार कर लोगों को गुमराह करने वाले ये शिक्षा माफिया टीसी व
मार्कशीट देने के नाम पर किसी से 100 तो किसी से 200 रूपये की वसूली कर
रहे है। स्कूल वाहन अधिकतर गैस से चलवाये जाते है। जिससे बच्चों की जान
का हर समय खतरा बना रहता है। लोग यहां तक कि अपने स्कूल का नाम पुस्तकों
पर छपवाकर धन उगाही कर रहे है। जो कि किसी अन्य दुकान पर उप्लब्ध न होने
से कीमत का अंदाजा नही लगता।
खण्ड में बिना मान्यता के ही दर्जनो विद्यालय अवैध रुप से चल रहे हैं। एक
तरफ जहां इन विद्यालयों के संचालनकर्ता ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों का
शोषण कर रहे हैं। दूसरी तरफ सब कुछ जानने के बाद भी शिक्षा विभाग के
अधिकारी कोई भी कार्यवाही नही कर रहे हैं। क्षेत्रीय ग्रामीणों ने प्रदेश
के शिक्षा मंत्री को पत्र भेजकर अवैध विद्यालयों के विरुद्ध कार्यवाही की
मांग की है। जानकारी के अनुसार, जैदपुर कस्बे सहित ग्रामीण क्षेत्रों में
मान्टेसरी स्कूलों का कारोबार दिन पर दिन फल फूल रहा है और बुलन्द हौसले
वाले संचालक की कमाई का बेहतरीन जरिया बना हुआ है। कक्षा 5 की मान्यता
लेकर कक्षा 8 से अधिक तक शिक्षा देने का कार्य पुराना हो चुका है। कुछ
एैसे भी स्कूल हैं जो कक्षा 1 की मान्यता भी नही है लेकिन कक्षा 8 तक
स्कूल चला रहे है। सुविधा के नाम पर लोगों से हजारों रूपये वसूला जा रहा
है। जबकि कोर्स बेचने व खरीदवाने की बात ही निराली है। कोई कमीशन को लेकर
दुकानदारों से वसूली कर रहा है। तो कोई स्वयं अपने ही स्कूल में किताबे
बेचकर अपनी जेबें भर कर गरीबों की जेब खाली करने पर उतारू है। तरह-तरह का
प्रचार प्रसार कर लोगों को गुमराह करने वाले ये शिक्षा माफिया टीसी व
मार्कशीट देने के नाम पर किसी से 100 तो किसी से 200 रूपये की वसूली कर
रहे है। स्कूल वाहन अधिकतर गैस से चलवाये जाते है। जिससे बच्चों की जान
का हर समय खतरा बना रहता है। लोग यहां तक कि अपने स्कूल का नाम पुस्तकों
पर छपवाकर धन उगाही कर रहे है। जो कि किसी अन्य दुकान पर उप्लब्ध न होने
से कीमत का अंदाजा नही लगता।

