किसान ने फेंका 13 क्विंटल प्याज 5 पैसा प्रति किलो लगाया दाम, गुस्साए
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महाराष्ट्र के नासिक जिले में करंजगांव के एक किसान 5 पैसे प्रति किलो प्याज बेचने की बजाय उसे अपने ही खेत में 13 क्विंटल प्याज खेतों में फेंकना मुनासिब समझा। निफाद तालुका के रहने वाले सुधाकर दराडे ने कहा कि उन्होंने सायखेड़ा एपीएमसी मंडी में अपनी प्याज नहीं बेची। वहां उनके प्याज की कीमत 5 रुपये प्रति क्विंटल (100 किलो) लगाई गई। उनके 13 क्विंटल प्याज का दाम कुल 65 रुपये लगाया गया।
निराश किसान ने कहा कि उन्हें प्याज उपजाने में 700 रुपये प्रति एकड़ से ज्यादा का खर्चा आया था और एपीएमसी मंडी भेजने में उसे परिवहन पर 780 रुपये देने पड़े। दराडे ने कहा कि मंडी में लगाई गई कीमत से उनकी लागत भी नहीं निकल रही थी। इसलिए वह मंडी से घर लौट आए और उसने कुल 13 क्विंटल प्याज को अपने खेत में डाल दिया। उसने कहा कि इतनी कम कीमत में बचने से अच्छा है कि प्याज खेत में डाल दिया जाए, कम से कम जमीन की उर्वरा शक्ति तो बढ़ेगी।
नासिक लाल प्याज के उत्पादन के लिए मशहूर है और यहां एशिया की सबसे बड़ी प्याज मंडी लासलगांव में प्याज नीलामी के जरिए बेची जाती है। सुधाकर ने कहा कि ‘मैंने पिछले साल नवंबर-दिसंबर में अपने 10 एकड़ जमीन पर प्याज का पैदावार किया था। मैंने 1,000 क्विंटल प्याज अपने घर में रखे थे और उम्मीद थी कि मुझे अप्रैल में इसके अच्छे दाम मिल जाएंगे। लेकिन जून-जुलाई के दौरान कारोबारियों की 35 दिनों से हड़ताल के कारण मंडी में प्याज की नीलामी नहीं हो सकी। इस वजह से प्याज सड़ने लगे।’ 12 अगस्त को जब वह मंडी पहुंचे तो प्याज की कम कीमत से वह निराश हो गए।
निराश किसान ने कहा कि उन्हें प्याज उपजाने में 700 रुपये प्रति एकड़ से ज्यादा का खर्चा आया था और एपीएमसी मंडी भेजने में उसे परिवहन पर 780 रुपये देने पड़े। दराडे ने कहा कि मंडी में लगाई गई कीमत से उनकी लागत भी नहीं निकल रही थी। इसलिए वह मंडी से घर लौट आए और उसने कुल 13 क्विंटल प्याज को अपने खेत में डाल दिया। उसने कहा कि इतनी कम कीमत में बचने से अच्छा है कि प्याज खेत में डाल दिया जाए, कम से कम जमीन की उर्वरा शक्ति तो बढ़ेगी।
नासिक लाल प्याज के उत्पादन के लिए मशहूर है और यहां एशिया की सबसे बड़ी प्याज मंडी लासलगांव में प्याज नीलामी के जरिए बेची जाती है। सुधाकर ने कहा कि ‘मैंने पिछले साल नवंबर-दिसंबर में अपने 10 एकड़ जमीन पर प्याज का पैदावार किया था। मैंने 1,000 क्विंटल प्याज अपने घर में रखे थे और उम्मीद थी कि मुझे अप्रैल में इसके अच्छे दाम मिल जाएंगे। लेकिन जून-जुलाई के दौरान कारोबारियों की 35 दिनों से हड़ताल के कारण मंडी में प्याज की नीलामी नहीं हो सकी। इस वजह से प्याज सड़ने लगे।’ 12 अगस्त को जब वह मंडी पहुंचे तो प्याज की कम कीमत से वह निराश हो गए।

