चंचल मर्डर केस के आरोपी फय्याज़ की हत्या, गुत्थी उलझी!
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लखनऊ/सुल्तानपुर । चंचल तिवारी मर्डर केस का मुख्य आरोपी चर्चित फय्याज़ आखिर सदा के लिये सो गया लेकिन खुद सोमवार की रात हुए फय्याज़ के मर्डर की गुत्थी उलझ गई है, इस मर्डर ने कई सवाल खड़े कर दिये हैं जिसका जवाब न तो पुलिस के पास है और न मौके पर फय्याज़ के साथ रहे उसके साथियों के पास।
शहर के एक ढाबे पर बीती रात 10 बजे फय्याज़ अपने साथियों के साथ बैठा था तभी एक-दो आदमी ढाबे पर आ धमके, जबतक साथी या और कोई कुछ समझता हमलावरों ने फय्याज़ पर गोली दागी और निकल भागे, जैसे-तैसे खून में लथ-पथ फय्याज़ अस्पताल पहुँचा और यहां से लखनऊ ले जाते समय रास्ते में उसकी मौत हो गई।
उधर पुलिस ने डंडा उठाया बस स्टैण्ड, डाक खाना चौराहा एवं ज़िला पंचायत के समीप डंडा पटक कर प्रतिष्ठानों को बंद कराना शुरु कर दिया, रोज़ जहां इस वक़्त इन सड़कों पर चहल पहल होती थी वहां सोमवार रात गहरा सन्नाटा पसरा था, मालूम होता था वारदात के बाद पुलिस को किसी अनहोनी का ख़तरा सता रहा था।
इसी क्रम में फय्याज़ मर्डर केस में गुथ्थी यहां आकर उलझी कि हर ख़बर में मीडिया को पहले इन्फार्म करने वालों ने वारदात के घंटों बाद तक इन्फार्म करना सही नहीं समझा, देर रात कहीं जाकर एक-दो मीडिया कर्मियों को बड़ी सुगबुगाहट के बाद सूचना शहर में हुए मर्डर की ख़बर हुई, वहीं फय्याज़ मर्डर केस की वो गुथ्थी जिसने आम-आदमी क्या पुलिस का सर चकरा रखा है वो ये कि फय्याज़ दो मर्डर केसों का आरोपी था आखिर कहीं उसके मर्डर की कहानी रंजिशन इन दोनों मर्डर के वादियों ने तो नहीं रच डाली? वो तीन साथी जो फय्याज़ के साथ थे उन्हें न तो खरोंच आई न ही वो फय्याज़ के बचाव में आये? इन तीन साथियों के अलावा वारदात को सिविल पहनावे में आकर अंजाम देने वाला वो कौन चेहरा था जिसे फय्याज़ के अलावा उसके साथी नहीं पहचान सके?
उधर फय्याज़ के परिवार की ओर से मिली तहरीर पर पुलिस ने जो मुकदमा दर्ज किया है वो अज्ञात लोगों के खिलाफ दर्ज हुआ है, और फय्याज़ के साथ रहे साथियों को उठाकर मर्डर केस की गुथ्थी सुलझाने में जुट गई है।
शहर के एक ढाबे पर बीती रात 10 बजे फय्याज़ अपने साथियों के साथ बैठा था तभी एक-दो आदमी ढाबे पर आ धमके, जबतक साथी या और कोई कुछ समझता हमलावरों ने फय्याज़ पर गोली दागी और निकल भागे, जैसे-तैसे खून में लथ-पथ फय्याज़ अस्पताल पहुँचा और यहां से लखनऊ ले जाते समय रास्ते में उसकी मौत हो गई।
उधर पुलिस ने डंडा उठाया बस स्टैण्ड, डाक खाना चौराहा एवं ज़िला पंचायत के समीप डंडा पटक कर प्रतिष्ठानों को बंद कराना शुरु कर दिया, रोज़ जहां इस वक़्त इन सड़कों पर चहल पहल होती थी वहां सोमवार रात गहरा सन्नाटा पसरा था, मालूम होता था वारदात के बाद पुलिस को किसी अनहोनी का ख़तरा सता रहा था।
इसी क्रम में फय्याज़ मर्डर केस में गुथ्थी यहां आकर उलझी कि हर ख़बर में मीडिया को पहले इन्फार्म करने वालों ने वारदात के घंटों बाद तक इन्फार्म करना सही नहीं समझा, देर रात कहीं जाकर एक-दो मीडिया कर्मियों को बड़ी सुगबुगाहट के बाद सूचना शहर में हुए मर्डर की ख़बर हुई, वहीं फय्याज़ मर्डर केस की वो गुथ्थी जिसने आम-आदमी क्या पुलिस का सर चकरा रखा है वो ये कि फय्याज़ दो मर्डर केसों का आरोपी था आखिर कहीं उसके मर्डर की कहानी रंजिशन इन दोनों मर्डर के वादियों ने तो नहीं रच डाली? वो तीन साथी जो फय्याज़ के साथ थे उन्हें न तो खरोंच आई न ही वो फय्याज़ के बचाव में आये? इन तीन साथियों के अलावा वारदात को सिविल पहनावे में आकर अंजाम देने वाला वो कौन चेहरा था जिसे फय्याज़ के अलावा उसके साथी नहीं पहचान सके?
उधर फय्याज़ के परिवार की ओर से मिली तहरीर पर पुलिस ने जो मुकदमा दर्ज किया है वो अज्ञात लोगों के खिलाफ दर्ज हुआ है, और फय्याज़ के साथ रहे साथियों को उठाकर मर्डर केस की गुथ्थी सुलझाने में जुट गई है।

