दिव्यांगो को नसीब नही हो रहे शौंचालय
https://husainijnp.blogspot.com/2016/08/blog-post_58.html
बाराबंकी। आठ सूत्रीय मांगो को लेकर गन्ना दफ्तर में धरना दे रहे
दिव्यांगो पर मौसम के साथ बीमारियों का प्रकोप भी जारी हो गया। बीती रात
तीन प्रदर्शनकारियों को गंभीर हालत के चलते जिला चिकित्सालय में भर्ती
कराया गया। जहां पर उनकी हालत गंभीर बनी हुई है। धरने पर बैठे लोगों को
सम्बोधित करते हुए रंजीता देवी ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा व अपमान को
लेकर राजनीतिक संघर्ष मचा हुआ है। जनपद में हजारों की संख्या में ही
दिव्यांग महिलाएं हैं। जिन्हे प्रतिदिन कई बार नई जिंदगी मिलती है। अगर
जिला प्रशासन गंभीरता से दिव्यांगो की परेशानियों पर विचार करे तो कुदरती
अभिशाप से ग्रस्त लोगों का जीवन पार हो सके। सरकार व जिला प्रशासन आाये
दिन दिव्यांगजनों को गांव में ही सुविधांए उपलब्ध कराने का दावा करता है।
परन्तु सैकड़ो बुजुर्ग दिव्यांग शौंचालय तक से अब तक वंचित हैं। जिला
प्रशासन द्वारा निर्धारित किया गया धरना स्थल भी शौंचालय के लिये तरस रहा
है। यहां आने वाले लोगों के साथ महिलाओं तक को झाड़ियों में शौंच के लिये
जाना पड़ता है। जिला चिकित्सालय में अंशू देवी, दिनेश कुमार, रामा देवी
आदि ने बताया कि जिला प्रशासन द्वारा धरनास्थल पर फैली अव्यवस्थाओं पर
ध्यान नही दिया जा रहा है। जिसके चलते किसी भी दिन किसी की भी जान जा
सकती है। विदित हो कि आवास राशन कार्ड, शौचालय, पेंशन, उपकरण आदि को लेकर
विगत् 30 जुलाई भारतीय दिव्यांग कल्याण सेवा परिषद के बैनर तले धरना
प्रदर्शन शुरु किया गया था। धरने के चौथे दिन भी जिला प्रशासन का कोई
सक्षम अधिकारी मौके पर नही पहुंचा है। जिसको लेकर दिव्यांगो में आक्रोश
व्याप्त है। धरने को सम्बोधित करते हुए अनिल यादव ने कहा कि दिव्यांगजनों
को जब तक पात्रता के आधार पर आवश्यक समस्या का निस्तारण नही किया जायेगा।
तब तक धरना प्रदर्शन जारी रहेगा। विजय बहादुर वर्मा ने कहा कि दिव्यांगो
के स्वरोजगार हेतु संचालित की गयी। एनएचएफडीसी योजना ग्रामीण बैंक द्वारा
सुलभ नही करायी जा रही। दिव्यांगो के नाम पर पिछले वित्तीय वर्ष मंे जारी
किये गये 6 करोड़ 51 लाख रुपये ग्रामीण बैंक ने अपनी पूंजी बना रखी है।
जबकि दिव्यांगजनों को लाख-पचास हजार रुपये तक उपलब्ध नही कराये जा रहे।
बैंक जाने पर शाखा प्रबंधक इस तरह उपहास उड़ाते हैं कि जैसे कर्ज मांगकर
दिव्यांग ने कोई गुनाह किया हो। इतना ही नही दलालों के हाथ की कठपुतली
बने मैनेजर आंखे बंद कर बैंक की रकम लुटा रहे हैं। श्री वर्मा ने कहा कि
पुलिस प्रशासन पैसे की वसूली कर मजबूर दिव्यांगो की जमीनों पर कब्जा करा
रही है और उच्चाधिकारी आदेश निर्देश तक सीमित हैं। जब तक उच्चाधिकारी
स्वंय स्थलीय जांच नही करेंगे। तब तक भ्रष्टाचार की गंगोत्री में डुबकी
लगा रहे बाबू लोगों की समस्याओं का निस्तारण नही होने देंगे और उनकी
शिकायत के नाम पर अपनी जेबे भरते रहेंगे। इस अवसर पर परशुराम रावत, अंशू
जायसवाल, देशराज, विजय कुमार, राजाराम, मंशाराम, मनीष कुमार, आशीष कुमार,
अनिल श्रीवास्तव सहित तमाम लोग मौजूद रहे।
दिव्यांगो पर मौसम के साथ बीमारियों का प्रकोप भी जारी हो गया। बीती रात
तीन प्रदर्शनकारियों को गंभीर हालत के चलते जिला चिकित्सालय में भर्ती
कराया गया। जहां पर उनकी हालत गंभीर बनी हुई है। धरने पर बैठे लोगों को
सम्बोधित करते हुए रंजीता देवी ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा व अपमान को
लेकर राजनीतिक संघर्ष मचा हुआ है। जनपद में हजारों की संख्या में ही
दिव्यांग महिलाएं हैं। जिन्हे प्रतिदिन कई बार नई जिंदगी मिलती है। अगर
जिला प्रशासन गंभीरता से दिव्यांगो की परेशानियों पर विचार करे तो कुदरती
अभिशाप से ग्रस्त लोगों का जीवन पार हो सके। सरकार व जिला प्रशासन आाये
दिन दिव्यांगजनों को गांव में ही सुविधांए उपलब्ध कराने का दावा करता है।
परन्तु सैकड़ो बुजुर्ग दिव्यांग शौंचालय तक से अब तक वंचित हैं। जिला
प्रशासन द्वारा निर्धारित किया गया धरना स्थल भी शौंचालय के लिये तरस रहा
है। यहां आने वाले लोगों के साथ महिलाओं तक को झाड़ियों में शौंच के लिये
जाना पड़ता है। जिला चिकित्सालय में अंशू देवी, दिनेश कुमार, रामा देवी
आदि ने बताया कि जिला प्रशासन द्वारा धरनास्थल पर फैली अव्यवस्थाओं पर
ध्यान नही दिया जा रहा है। जिसके चलते किसी भी दिन किसी की भी जान जा
सकती है। विदित हो कि आवास राशन कार्ड, शौचालय, पेंशन, उपकरण आदि को लेकर
विगत् 30 जुलाई भारतीय दिव्यांग कल्याण सेवा परिषद के बैनर तले धरना
प्रदर्शन शुरु किया गया था। धरने के चौथे दिन भी जिला प्रशासन का कोई
सक्षम अधिकारी मौके पर नही पहुंचा है। जिसको लेकर दिव्यांगो में आक्रोश
व्याप्त है। धरने को सम्बोधित करते हुए अनिल यादव ने कहा कि दिव्यांगजनों
को जब तक पात्रता के आधार पर आवश्यक समस्या का निस्तारण नही किया जायेगा।
तब तक धरना प्रदर्शन जारी रहेगा। विजय बहादुर वर्मा ने कहा कि दिव्यांगो
के स्वरोजगार हेतु संचालित की गयी। एनएचएफडीसी योजना ग्रामीण बैंक द्वारा
सुलभ नही करायी जा रही। दिव्यांगो के नाम पर पिछले वित्तीय वर्ष मंे जारी
किये गये 6 करोड़ 51 लाख रुपये ग्रामीण बैंक ने अपनी पूंजी बना रखी है।
जबकि दिव्यांगजनों को लाख-पचास हजार रुपये तक उपलब्ध नही कराये जा रहे।
बैंक जाने पर शाखा प्रबंधक इस तरह उपहास उड़ाते हैं कि जैसे कर्ज मांगकर
दिव्यांग ने कोई गुनाह किया हो। इतना ही नही दलालों के हाथ की कठपुतली
बने मैनेजर आंखे बंद कर बैंक की रकम लुटा रहे हैं। श्री वर्मा ने कहा कि
पुलिस प्रशासन पैसे की वसूली कर मजबूर दिव्यांगो की जमीनों पर कब्जा करा
रही है और उच्चाधिकारी आदेश निर्देश तक सीमित हैं। जब तक उच्चाधिकारी
स्वंय स्थलीय जांच नही करेंगे। तब तक भ्रष्टाचार की गंगोत्री में डुबकी
लगा रहे बाबू लोगों की समस्याओं का निस्तारण नही होने देंगे और उनकी
शिकायत के नाम पर अपनी जेबे भरते रहेंगे। इस अवसर पर परशुराम रावत, अंशू
जायसवाल, देशराज, विजय कुमार, राजाराम, मंशाराम, मनीष कुमार, आशीष कुमार,
अनिल श्रीवास्तव सहित तमाम लोग मौजूद रहे।

