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बारिश तो थम जाती है लेकिन पेड़ बरसते रहते हैं

बाराबंकी। शहर के इन्दिरा मार्केट स्थित के खुमार मेमोरियल एकेडमी में एक
मुशायरे का आयोजन किया गया। मुशायरे की अध्यक्षता रहबर तबानी ने की और
शायर सगीर नूरी ने संचालन की। मुशायरे की शुरुआत निहाल रिजवी ने अपने
कलाम से की। जब जबाने में कुछ एहसास की कीमत ही नही-दिल हकीकत से तो
अच्छा है कहानी हो जाये। सगीर नूरी ने पढ़ा-देख ले आके मेरी अब्ला पाई है
गवा। कितने सहराओं को आबाद किया है मैने। वकार बाराबंकवी ने कहा सुना है
मुझपे कोई मेहरबां है। संभल-ए-दिल। तेरा फिर इम्तिहां है। डा. फिदा हुसैन
ने अपने अंदाज में पढ़ा किससे कतराएं कहां जाऊं किधर से निकलूं। अपने
मांजी से उलझ जाऊं जिधर से निकलूं। युवा तेज तर्रार अधिवक्ता हिसाल बारी
किदवई ने पढ़ा-खाली हो जाने पर भी कुछ अब्र गजरते रहते हैं। बारिश तो थम
जाती है लेकिन पेड़ बरसते रहते हैं। शायरा पूनम नाज ने तरन्नुम में अपने
कलाम पेश किये मेरा हौसला है अभी तक सलामत। ये किसने कहा है कि मैं डरने
लगी हूं। इनके अलावा रहबर तबानी, डा. रजा मौरानवी, रिफत अजमी, शुएब अनवर,
कशिश सण्डीलवी, जफर दरियाबादी, इरशाद बाराबंकवी, नफीश बाराबंकवी, सबा
जहांगीराबादी ने भी अपना कलाम पेश किया। आखिर में मुशायरे में आये हुए
शायरो का खुमार मेमोरियल एकेडमी के सचिव वकार बाराबंकवी ने तहे दिल से
शुक्रिया अदा किया।

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