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जड़ी-बूटी दिवस के रूप में मना आचार्य बालकृष्ण का जन्मदिन

जौनपुर। योग के साथ भारत की प्राचीनतम चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद को पूरी प्रमाणिकता के साथ वैश्विक स्तर पर पहुंचाने वाले श्रदेय आचार्य बालकृष्ण जी के जन्मदिन को पतंजलि योग परिवार ने जड़ी-बूटी दिवस के रूप में मनाते हुये हजारों औषधि पौधों का वितरण किया। कलेक्ट्रेट स्थित योग स्थल पर जड़ी बूटी दिवस का शुभारम्भ करते हुये जिला पंचायत अध्यक्ष राज बहादुर यादव ने बताया कि आज पूरे समाज की बहुत बड़ी जिम्मेदारी बनती है कि वह अधिक से अधिक पौधों का रोपण करके जीवन के लिये सबसे महत्वपूर्ण तत्व प्राण वायु को पैदा करके सम्पूर्ण जीवधारियों के जीवनकाल को लम्बा बनायें। इस मौके पर श्री यादव द्वारा पौधरोपण के साथ विविध प्रकार की जड़ी-बूटीयों का रोपण करते हुये उससे होने वाले लाभों को भी बताया गया। इस अवसर पर जिला प्रभारी कृष्ण मुरारी आर्य, शशिभूषण यादव, प्रो. वीडी शर्मा, प्रो. केबी यादव, चन्द्रशेखर यादव, महेन्द्र मौर्य, धर्मेंद्र यादव, प्रदीप, राम सजीवन, शैलेश, कृपाशंकर, लोकनाथ, दीपक, ड. सीपी राय, धु्रवराज, हेमंत, चन्द्रसेन, राजेश, संतोष, मोनू, कुलदीप, अवधेश, अशोक, लाल बहादुर, राजेन्द्र, संजय, मदन मोहन, सिकन्दर, मनीष, रामकुमार, विपिन, पत्रकार अजय पाण्डेय सहित अनेक गणमान्य लोगों ने प्रतिभाग किया। अन्त में प्रान्तीय सह प्रभारी अचल हरीमूर्ति ने समस्त आगन्तुकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुये जन-जन तक योग व आयुर्वेद को पहुंचाने हेतु धन्यवाद दिया।
पूर्वांचल विश्वविद्यालय परिसर के मुक्तांगन में स्थित विश्व योग केन्द्र में संचालक आचार्य विक्रमदेव के मार्गदर्शन में प्रतिदिन की भांति आज भी योग-प्राणायाम का अभ्यास योग साधिका डा. अंजुम ने कराया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे सोशल मीडिया के राज्य प्रभारी आचार्य विक्रमदेव, मुख्य अतिथि वित्त अधिकारी एमके सिंह, श्रीमती ममता भट्ट जिला प्रभारी, महिला पतंजलि योग समिति, पूर्वांचल के रामानुजम के नाम से प्रतिष्ठित, विख्यात गणितज्ञ वृक्षमित्र डा. राजकुमार, अधीक्षक डा. राजेश जैन, गोपनीय अधीक्षक मदन मोहन भट्ट सहित अन्य कई वक्ताओं ने आज के जड़ी बूटी दिवस पर सभी योगी साधकों एवं देशभक्तों को जड़ी बूटी के बारे में बताया। साथ ही घृत कुमारी (एलोवेरा), तुलसी, गिलोय (अमृता), धतुर, मंदार आदि औषधीय गुणों पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का संचालन डा. संजय ने किया। अन्त मं आचार्य डा. विक्रमदेव जी ने आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर तमाम लोग उपस्थित रहे।

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