श्रीकांत की भूख से मौत के बाद मां ने भी तोड़ा दम
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बाराबंकी। थाना असन्द्रान्तर्गत बीते जून माह में भुखमरी व अभावों के
चलते दम तोड़ने वाले गरीब श्रीकान्त की मां न ने भी अभावों से जूझते हुए
दम तोड़ दिया। उल्लेखनीय है कि बीते 5 जून को पकरिहा मजरे जरगांवा गांव के
श्रीकान्त उर्फ गुड्डू दीक्षित 40 पुत्र विशम्भर दीक्षित की मौत हो गई
थी। वह अपनी मां कल्याणी देवी के साथ रहता था जबकि उसका भाई शिवाकान्त
अपनी नेत्रहीन पत्नी के साथ उससे अलग रहता था। परिजनो ने श्रीकान्त की
मौत का कारण भुखमरी बताया था। इस परिवार की गरीबी निर्विवादित थी। हालात
भुखमरी के थे। काम करने में लाचार श्रीकान्त गांव में मांगकर अपना व अपनी
वृद्ध मां का पेट पाल रहा था। गांव वालो के रहमो करम पर मां बेटे चल रहे
थे। पता चला है कि परिवार के नाम एक विस्वा जमींन तक नही थी और न ही उसके
पास कोई राशन कार्ड ही था। भीख मांगकर दोनो मां बेटे किसी तरह से अपना
पेट भर रहे थे। करीब एक पखवारा पूर्व श्रीकान्त चलने फिरने में लाचार हो
गया और चारपाई पकड़ ली थी। भोजन न मिलने से उसकी हालत बिगड़ती गई और बीते 5
जून को उसने दम तोड़ दिया था। बेटे की मौत के बाद महिला केा पात्र गृहस्थी
योजना के तहत चन्द किग्रा खाद्यान्न दिया जा रहा था। अभावों से जूझती हुई
कल्याना देवी भी परलोक सिधार गई। महिा की मौत के बाद इस गरीब परिवार में
अब मृतका का पुत्र शिवाकान्त ही बचा है,जो मेहनत मजदूरी करके अपना पेट
पाल रहा है।
चलते दम तोड़ने वाले गरीब श्रीकान्त की मां न ने भी अभावों से जूझते हुए
दम तोड़ दिया। उल्लेखनीय है कि बीते 5 जून को पकरिहा मजरे जरगांवा गांव के
श्रीकान्त उर्फ गुड्डू दीक्षित 40 पुत्र विशम्भर दीक्षित की मौत हो गई
थी। वह अपनी मां कल्याणी देवी के साथ रहता था जबकि उसका भाई शिवाकान्त
अपनी नेत्रहीन पत्नी के साथ उससे अलग रहता था। परिजनो ने श्रीकान्त की
मौत का कारण भुखमरी बताया था। इस परिवार की गरीबी निर्विवादित थी। हालात
भुखमरी के थे। काम करने में लाचार श्रीकान्त गांव में मांगकर अपना व अपनी
वृद्ध मां का पेट पाल रहा था। गांव वालो के रहमो करम पर मां बेटे चल रहे
थे। पता चला है कि परिवार के नाम एक विस्वा जमींन तक नही थी और न ही उसके
पास कोई राशन कार्ड ही था। भीख मांगकर दोनो मां बेटे किसी तरह से अपना
पेट भर रहे थे। करीब एक पखवारा पूर्व श्रीकान्त चलने फिरने में लाचार हो
गया और चारपाई पकड़ ली थी। भोजन न मिलने से उसकी हालत बिगड़ती गई और बीते 5
जून को उसने दम तोड़ दिया था। बेटे की मौत के बाद महिला केा पात्र गृहस्थी
योजना के तहत चन्द किग्रा खाद्यान्न दिया जा रहा था। अभावों से जूझती हुई
कल्याना देवी भी परलोक सिधार गई। महिा की मौत के बाद इस गरीब परिवार में
अब मृतका का पुत्र शिवाकान्त ही बचा है,जो मेहनत मजदूरी करके अपना पेट
पाल रहा है।

