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मानव उत्थान सेवा समिति का दो दिवसीय सत्संग सम्पन्न

अजमी रिज़वी
बाराबंकी। मानव उत्थान सेवा समिति द्वारा गांधी भवन में आयोजित दो दिवसीय
सद्भावना संत सम्मेलन एवं अध्यात्मिक सत्संग का आज समापन हुआ। सत्संग
सारगर्भित रामायण, श्रीमद भागवत, गीता एवं अन्य धर्म ग्रन्थों के साथ ही
मानव धर्म और उत्थान पर आधारित था। इस मौके पर सद्गुरुदेव सतपाल जी महराज
की शिष्या साध्वी पार्वती बाई ने अपने उद्बोधन में कहा कि भक्त तो सभी
हैं और लोग भक्ति भी खूब करते हैं। किन्तु वह भक्ति केवल संतति और
सम्पत्ति की ही करते हैं। जबकि भक्ति भगवान की करनी चाहिये। ताकि जन्म
लेने तथा मनुष्य होने का भाव सार्थक कर सकें। साध्वी पार्वती बाई ने कहा
कि यह शरीर सीढ़ी के समान है।
जिससे ऊपर भी जाया जा सकता है और नीचे भी
उतरा जा सकता है अर्थात उर्द्धगामी होकर मोक्ष और अधोगति होने पर
सांसारिक सुख का अनुभव कर सकें। यह शरीर मोक्ष का द्वार है हमेें इसे
पाकर परलोक को सवांरने का मौका मिलता है। आत्मा मानव शरीर की संचालक है।
शरीर में प्राण का स्पंदन श्वास करता है। महात्मा बैजनाथानन्द ने कहा कि
शिव का नाम राम से भी बड़ा है। सत्संग के उपरान्त विशाल भण्डारा एवं
प्रसाद वितरण का आयोजन किया गया। सत्संग के मौके पर राजबहादुर त्रिवेदी,
प्रेमपाल सिंह, अशोक कुमार कश्यप, रामतीरथ यादव, रामचन्द्र यादव, रतिपाल,
रामसिंहासन कुशवाहा, मनोरमा श्रीवास्तव, उर्मिला तिवारी, रानी तिवारी,
सियालली त्रिवेदी, सरस्वती शर्मा सहित कई भक्तगण मौजूद रहे।

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