रसोईयां और नेता जी को मिल रही है मजदूरी, सीएम से शिकायत
https://husainijnp.blogspot.com/2016/09/blog-post_742.html
अजमी रिज़वी
रामनगर, बाराबंकी। विकास खण्ड रामनगर में ग्राम प्रधान व ग्राम विकास
अधिकारी की मिली भगत से मनरेगा में जमकर धांधली की जा रही है। कागजों पर
ही अपने चहेतों का काम दिखाकर करके उनके खातों मे हजारो रुपये भेजे जा
रहे हैं। जबकि जो मजदूर मेहनत करके काम करते हैं। उनकी मजदूरी कई महीने
बीत जाने के बाद भी नही मिल पा रही है। क्षेत्रीय ग्रामीणों ने प्रदेश के
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव सहित अन्य उच्चाधिकारियों को पत्र भेजकर इस
गड़बड़झाले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। जानकारी के अनुसार, विकास
खण्ड रामनगर की ग्राम पंचायत अमोनी कला में इन दिनों विकास कार्यों के
नाम पर जमकर लूट मची है। गांव में प्रधान ने तालाब खुदवाया और कच्ची
चकरोड की पटाई करवायी। लेकिन मजदूर अगर जहां बीस काम कर रहे थे। वहीं
ग्राम प्रधान ने पचास लोगों का नाम चढ़ाकर अपने चहेतों को लाभ पहुंचाया।
सबसे मजेदार बात यह भी थी कि जिसमें एक रसोइया का नाम भी मनरेगा मजदूर
में दर्ज है और उसके खाते में पैसा आया है। सबसे चिंतनीय बात यह है कि
रसोईयां विद्यालय में खाना बना रही है। या फिर मजदूरी का काम कर रही है।
इसी तरह एक नेता जो अपने आपको किसानों का मसीहा बताते हैं। उनका नाम भी
मनरेगा की मजदूरी धड़ल्ले से आ रही है। इस सम्बन्ध में जब ग्राम प्रधान से
वार्ता की गयी तो उनका कहना था कि जितने मजदूरों ने काम किया है उतने
मजदूरों की ही मजदूरी उनके खातों में गयी है। उन्होने फर्जी मजदूरों की
मजदूरी से इंकार किया है। वहीं खण्ड विकास अधिकारी रामनगर का कहना है कि
अगर इस तरह का घोटाला अमोली कला गांव में हुआ है तो इसकी जांच कराकर
कार्यवाही की जायेगी।
बड़े कास्तकारों के बने है कार्ड
रामनगर, बाराबंकी। ग्राम अमोली कला में गरीबी का मानक अलग है। यहां पर
ग्राम प्रधान और ग्राम विकास अधिकारी में अपना अलग नियम कायदा कानून बना
रखा है। घर में अगर चार पहिया वाहन है। लम्बा कास्तकार है। या घर के
सदस्य सरकारी नौकरी में कार्यरत हैं या फिर बहुमंजिले मकान में तो समझ लो
यह सभी लोग पात्र गृहस्थी या फिर अन्त्योदय कार्ड धारक के पात्र हैं। जिस
गरीब के पास रहने को आवास नही। कच्ची झोपड़ी में रह रहा है और मेहनत
मजदूरी करके अपने घर की जीविका चला रहा है। उन गरीबों के पास कोई भी राशन
कार्ड नही है। न ही उनको किसी सरकारी योजना का लाभ मिल रहा है। अभी जल्द
ही ग्राम प्रधान के इशारे पर करीब 100 पात्र ग्रामीणों के राशन कार्ड इसी
मानक के तहत काट दिये गये हैं। वहीं इस सम्बन्ध में जब ग्राम प्रधान से
जानकारी की गयी तो उनका कहना था कि मेरे यहां जितने भी कार्ड बने हैं वह
सब मानक के अनुरुप ही बने हैं। मेरा काम न कार्ड काटना है और न ही कार्ड
बढ़ाना है।
रामनगर, बाराबंकी। विकास खण्ड रामनगर में ग्राम प्रधान व ग्राम विकास
अधिकारी की मिली भगत से मनरेगा में जमकर धांधली की जा रही है। कागजों पर
ही अपने चहेतों का काम दिखाकर करके उनके खातों मे हजारो रुपये भेजे जा
रहे हैं। जबकि जो मजदूर मेहनत करके काम करते हैं। उनकी मजदूरी कई महीने
बीत जाने के बाद भी नही मिल पा रही है। क्षेत्रीय ग्रामीणों ने प्रदेश के
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव सहित अन्य उच्चाधिकारियों को पत्र भेजकर इस
गड़बड़झाले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। जानकारी के अनुसार, विकास
खण्ड रामनगर की ग्राम पंचायत अमोनी कला में इन दिनों विकास कार्यों के
नाम पर जमकर लूट मची है। गांव में प्रधान ने तालाब खुदवाया और कच्ची
चकरोड की पटाई करवायी। लेकिन मजदूर अगर जहां बीस काम कर रहे थे। वहीं
ग्राम प्रधान ने पचास लोगों का नाम चढ़ाकर अपने चहेतों को लाभ पहुंचाया।
सबसे मजेदार बात यह भी थी कि जिसमें एक रसोइया का नाम भी मनरेगा मजदूर
में दर्ज है और उसके खाते में पैसा आया है। सबसे चिंतनीय बात यह है कि
रसोईयां विद्यालय में खाना बना रही है। या फिर मजदूरी का काम कर रही है।
इसी तरह एक नेता जो अपने आपको किसानों का मसीहा बताते हैं। उनका नाम भी
मनरेगा की मजदूरी धड़ल्ले से आ रही है। इस सम्बन्ध में जब ग्राम प्रधान से
वार्ता की गयी तो उनका कहना था कि जितने मजदूरों ने काम किया है उतने
मजदूरों की ही मजदूरी उनके खातों में गयी है। उन्होने फर्जी मजदूरों की
मजदूरी से इंकार किया है। वहीं खण्ड विकास अधिकारी रामनगर का कहना है कि
अगर इस तरह का घोटाला अमोली कला गांव में हुआ है तो इसकी जांच कराकर
कार्यवाही की जायेगी।
बड़े कास्तकारों के बने है कार्ड
रामनगर, बाराबंकी। ग्राम अमोली कला में गरीबी का मानक अलग है। यहां पर
ग्राम प्रधान और ग्राम विकास अधिकारी में अपना अलग नियम कायदा कानून बना
रखा है। घर में अगर चार पहिया वाहन है। लम्बा कास्तकार है। या घर के
सदस्य सरकारी नौकरी में कार्यरत हैं या फिर बहुमंजिले मकान में तो समझ लो
यह सभी लोग पात्र गृहस्थी या फिर अन्त्योदय कार्ड धारक के पात्र हैं। जिस
गरीब के पास रहने को आवास नही। कच्ची झोपड़ी में रह रहा है और मेहनत
मजदूरी करके अपने घर की जीविका चला रहा है। उन गरीबों के पास कोई भी राशन
कार्ड नही है। न ही उनको किसी सरकारी योजना का लाभ मिल रहा है। अभी जल्द
ही ग्राम प्रधान के इशारे पर करीब 100 पात्र ग्रामीणों के राशन कार्ड इसी
मानक के तहत काट दिये गये हैं। वहीं इस सम्बन्ध में जब ग्राम प्रधान से
जानकारी की गयी तो उनका कहना था कि मेरे यहां जितने भी कार्ड बने हैं वह
सब मानक के अनुरुप ही बने हैं। मेरा काम न कार्ड काटना है और न ही कार्ड
बढ़ाना है।

