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आगामी विस चुनाव में कहीं केराकत में खामियाजा न भुगत जाय भाजपा?

जौनपुर। केराकत में राष्ट्र विरोधी घटना को लेकर विरोध प्रदर्शन करने वाले हिन्दू युवा वाहिनी जिलाध्यक्ष विराट ठाकुर व वरिष्ठ भाजपा नेता सुरेन्द्र सोनकर सहित अन्य की गिरफ्तारी का मामला ठण्डा होने का नाम ही नहीं ले रहा है। इस प्रकरण में मछलीशहर लोकसभा क्षेत्र से भाजपा सांसद सहित भारतीय जनता पार्टी की जनपद इकाई की चुप्पी को लेकर लोगों में गम्भीर यक्ष प्रश्न बना हुआ है। मालूम हो कि बीते 15 अगस्त को स्थानीय नगर के मंेहदीतला में स्थित चर्चित एक मदरसे के छात्रों द्वारा नगर में निकाली गयी प्रभातफेरी में भारत विरोधी नारों की गूंज की घटना के बाद राष्ट्र विरोधी लोगों के खिलाफ जिला व पुलिस प्रशासन की चुप्पी और कार्यवाही में लीपापोती को लेकर केराकत बंद के दौरान हिन्दू युवा वाहिनी के जिलाध्यक्ष विराज ठाकुर एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता सुरेन्द्र सोनकर समेत 14 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया। इतना ही नहीं, विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर सभी को जेल भेजने के बाद लगभग 150 निर्दोषों के विरूद्ध सुनियोजित ढंग से संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज कर कुछ को जेल भेजने के साथ अन्य को नोटिस भेजने की कार्यवाही की गयी। ऐसी स्थिति में राष्ट्रवाद का नारा देने वाली भाजपा के स्थानीय सांसद सहित जिला संगठन के मुखिया का मुखर स्वरूप न होकर चुप्पी साधना गम्भीर सवालिया निशान लगाया हुआ है। लोगों में इस बात की जोरदार चर्चा है कि राष्ट्रवाद के मसले पर अपनी आवाज बुलंद करने वाली भाजपा के जिम्मेदार मुखर विरोध की बजाय आखिर क्यों चुप्पी साधे हुये हैं जबकि वहीं हिन्दू युवा वाहिनी के प्रदेश अध्यक्ष सुनील सिंह की चेतावनी और ललकार से न्याय की भावना से उत्साह जागृत कर लिया है। चर्चाओं की मानें तो भाजपा सांसद सहित जिला संगठन से क्षेत्र के हिन्दू वर्ग के लोगों में राष्ट्र विरोधी नारे को लेकर दोषियों व षड्यंत्रकारियों के खिलाफ कार्यवाही करने के लिये विरोध का जो तेवर दिखना चाहिये था, वह नहीं दिखा। लोगों में इस बात को लेकर भारी असंतोष है। इसी को लेकर क्षेत्र से लेकर जिले के लोगों का कहना है कि आने वाले समय में सांसद व भाजपा जिला इकाई के इन जिम्मेदार मौनी बाबा बने लोगों को जनता विशेषकर हिन्दू वर्ग को देना ही पड़ेगा। साथ ही इसकी भारी कीमत भी चुकानी पड़ेगी। जो हिन्दू जेल गये हैं और मुकदमे झेल रहे हैं, उन्हें राष्ट्र विरोधियों का विरोध करने के कारण जिला व पुलिस प्रशासन के उत्पीड़न का शिकार होकर मुकदमे झेलने व जेल जाने की कीमत अदा करनी ही पड़ेगी।

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