
आजमगढ़ । कर्बला के प्यासे शहीद हजरत इमाम हुसैन और 71 साथियों और लुटे हुए काफिले की याद में 11 मोहर्रम को जिले के भादव गांव स्तिथ ज़हीर हसन के इमामबारगाह पर विशाल मातमी जुलूस निकाला गया। जिसमें अंजुमनों ने दर्द भरे नौहें और मातम कर नजराने अकीदत पेश किया। ऐतिहासिक जुलूस की मजलिस मौलाना अहमद हसन ने पढ़ते हुए कहा कि कर्बला को शायद ही कोई भुला सकता है जिस तरह से हजरत अली और उनके बेटों ने इस्लाम को बचाने के लिए अपना भरा घर लूटा दिया वो कयामत तक लोग याद रखते रहेंगे। कर्बला में इमाम हुसैन ने अपने छोटे बच्चों को भी राहे हक पर कुर्बान कर दिया। यही वजह है कि आज पूरी दुनिया में उनका गम मनाया जा रहा है। इसमें सभी सम्प्रदाय के लोग शामिल होते है। हम सब उनके बताये हुए रास्ते पर चले तो इस दुनिया से आतंकवाद पूरी तरह से समाप्त हो सकता है। कर्बला में उस वक्त सबसे बड़ा आतंकवाद यजीद का था जिसने अपनी सारी हदें पार करते हुए हजरत मोहम्मद मुस्तफा (स.अ.) के नवासें को तीन दिन का भूखा प्यासा, शहीद कर दिया था। आज उन्हीं की याद में हम लोग मजलिस मातम और नौहा पढ़कर उनको नजराने अकीदत पेश कर रहे है। मजलिस के बाद शबीहे ताबूत अलम और जुलजनाह निकाला गया। जिसमें भादव , कालेपुर , और कुसुआ की मातमी अंजुमन नौहाख्वानी और सीनाजनी करते हुए जुलूस को पारंपरिक रास्तो से होता हुआ भादव में ही स्तिथ हादी हसन के इमामबारगाह पर ख़त्म हुआ । इस मौके पर सैय्यद कौसर , हादी हसन , सरफ़राज़ , एजाज़ हुसैन , मेहदी , जावेद , मासूम , फ़ैज़ी , कैफ़ी , प्रेस फाउंडेशन ट्रस्ट के अध्यक्ष आरिफ़ हुसैनी के साथ भारी संख्या में लोग मौजूद रहे । अंत में जुलुस के संयोजक प्रेस फाउंडेशन के उपाध्यक्ष अफसर हुसैन अनमोल ने सभी मोमनीन का शुक्रिया अदा किया । सुरक्षा के दृष्टिकोण से जिला प्रशासन ने भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की थी ।