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40 मिनट की मुख़्तार-अखिलेश की मुलाकात में सुलझ गए विवाद : अफ़ज़ाल अंसारी


समाजवादी पार्टी में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष शिवपाल यादव के बीच आज जो संघर्ष की स्थिति बनी है, उसके तमाम कारणों में से एक कौमी एकता दल का सपा में विलय भी था। मुख्‍तार अंसारी की छवि के चलते इस विलय पर अखिलेश यादव ने पहले नाराजगी जताई लेकिन अचानक कुछ ऐसा हुआ कि विलय को उनकी ओर से भी मंजूरी दे दी गई। आखिर क्‍या थी वो वजह जिसके चलते सीएम अखिलेश यादव कौमी एकता दल के सपा में विलय पर राजी हुए। एक निजी चैनल को दिए इंटरव्‍यू में इस बात का खुलासा खुद कौमी एकता दल के अध्यक्ष एवं मुख्‍तार अंसारी के भाई अफजाल अंसारी ने किया।

अफ़ज़ाल अंसारी ने कहा कि 18 सितंबर से लेकर आज तक की तारीख में बता दीजिए कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मुख्‍तार अंसारी या फिर हमारे परिवार के बारे में कुछ भी कहा हो। अब उनकी गलतफहमी दूर हो चुकी है। असल में सारा मामला ये था कि कुछ लोगों ने उनके सामने हमारी छवि बाहुबली और माफिया के रूप में पेश की थी। इसीलिए कुछ गलतफहमियां थीं।

उन्होंने कहा कि पूंजीवादी, सामंतवादी, माफिया और दबंग हैं जो गरीबों के साथ जानवरों से भी ज्‍यादा बुरा सलूक करते हैं वही हमारे परिवार के बारे में दुष्प्रचार कर रहे है । गरीबों के हक में हमारी लड़ाई ऐसे ही लोगों से है। जब हम बड़े-बड़े माफिया से लड़ेंगे तो आप अंदाजा लगा सकते हैं कि हमें क्‍या, कुछ सुनने को मिलेगा।

अफ़ज़ाल अंसारी ने कहा कि पिछले महीने की कोई 17 या 18 सितंबर की बात है। यूपी विधानसभा में पूर्व मुख्‍यमंत्रियों से संबंधित कोई प्रदर्शनी लगी हुई थी। अखिलेश यादव उसका उद्घाटन करने आए हुए थे। उसी दौरान 10 बजे से लेकर 10 बजकर 40 मिनट तक सीएम अखिलेश यादव और हमारे भाई मुख्‍तार अंसारी के बीच बातचीत हुई। बातचीत के दौरान उन्‍होंने पूरी बात बताई। बातचीत के बाद उनकी सारी गलतफहमी दूर हो गईं। आज आप उनसे हमारे बारे में पूछ सकते हैं। हम पहले भी उन्‍हें अपना नेता मानते थे और आज भी मानते हैं।
उन्होंने कहा कि सपा में कौमी एकता दल का विलय हुआ है कोई गठबंधन नहीं। इसलिए टिकटों का तो कोई मामला ही नहीं उठता है। वो जब भी टिकट देंगे और जहां से भी देंगे हम सपा के बैनर तले उनके निर्देशन में चुनाव लड़ेंगे।

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