नौ साल पुराने जौनपुर अज़ादारी ब्लॉग की कामयाबी का श्रेय जाता है मौलाना सफ़दर हुसैन जैदी को | एस एम् मासूम
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जौनपुर| मुहर्रम के महीने में जौनपुर में हर तरफ या हुसैन की आवाजें आने लगती हैं | मजलिस, शब्बेदारी, अज़ादारी के जुलूस निकाले जाते हैं | यह लोग हजरत मुहम्मद के नवासे इमाम हुसैन की शहादत का ग़म मनाते हैं जिनको यजीद ने कर्बला में भूखा प्यासा परिवार वालों के साथ शहीद किया था | इन जुलूस , मजलिस द्वारा यह लोग दुनिया को पैगाम दिया करते हैं की यह इंसानियत का परचम लहराने वाले इमाम हुसैन के मानने वाले हैं और समाज में ज़ालिम के खिलाफ हैं और उसका साथ देते हैं जिनपे ज़ुल्म हुआ है और इस प्रकार यह लोग आज आतंकवाद के खिलाफ ज़ुल्म के खिलाफ आवाज़ उठाते हैं |
इसी इंसानियत के पैगाम को दुनिया तक आगे पहुंचाने के लिए जनाब एस एम् मासूम ने एक ब्लॉग जौनपुर अज़ादारी २००७ में शुरू किया जिसे बाद में जौनपुर अज़ादारी डॉट कॉम से जोड़ दिया गया|
एस एम् मासूम से बात चीत पे उन्होंने बताया की वो इस जौनपुर अज़ादारी की कामयाबी का श्रेय धर्मगुरु मौलाना सफ़दर हुसैन जैदी को देते हैं जिनका सहयोग उन्हें २००७ में उस समय मिला जब वो जौनपुर के इमामबारगाह के इतिहास पे काम कर रहे थे और मौलाना ने उन्हें प्रोत्साहित किया |
पूरे नौ सालों से एस एम् मासूम साहब दुनिया को इंसानियत का पैगाम दे रहे हैं जिसके लिए वो बधाई के पात्र हैं |
