बुजुर्ग ने तड़प-तड़प कर तोड़ा दम, डॉक्टर खेलता रहा गेम
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उत्तर रेलवे के इंडोर अस्पताल में डॉक्टर मोबाइल पर वीडियो गेम खेलता रहा और फैजाबाद निवासी रेलकर्मी मथुरा प्रसाद पांडेय (74) ने दम तोड़ दिया।
मरीज को ऑक्सीजन सिलेंडर व स्ट्रेचर नहीं मिला, जिससे एंबुलेंस में ही प्राण निकल गए। परिवारीजनों ने जमकर रेलमंत्री व प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी व हंगामा किया।
खौफजदा डॉक्टर भाग गया और मामला शांत होने पर वापस लौटा। अस्पतालों में डॉक्टरों की ह्रदयहीनता का एक सुबूत बृहस्पतिवार रात उस वक्त मिला, जब फैजाबाद से इलाज के लिए आए रेलकर्मी मथुरा प्रसाद पांडेय ऑक्सीजन के लिए तड़पते रहे।
बेटे ह्रदयनारायण पांडेय ने बताया कि पिता 2003 में मुगलसराय में सीनियर लोको इंस्पेक्टर पद से रिटायर हुए थे। उन्हें दिल व गुर्दे की बीमारी थी। फैजाबाद में उनका इलाज चल रहा था।
20 दिन पहले उन्हें इलाज के लिए राजधानी लाया गया था और अवध हॉस्पिटल के आईसीयू में एडमिट कराया था, जहां 15 दिन भर्ती रखा गया।
चूंकि, पिताजी रेलवे अस्पताल में इलाज की जिद पर अड़े थे, इसलिए फैजाबाद जाकर उत्तर रेलवे के इंडोर अस्पताल के लिए रेफर करवाया। बृहस्पतिवार शाम पांच बजे फैजाबाद से एंबुलेंस में उन्हें लेकर निकले और रात नौ बजे अस्पताल पहुंचे।
मरीज को ऑक्सीजन सिलेंडर व स्ट्रेचर नहीं मिला, जिससे एंबुलेंस में ही प्राण निकल गए। परिवारीजनों ने जमकर रेलमंत्री व प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी व हंगामा किया।
खौफजदा डॉक्टर भाग गया और मामला शांत होने पर वापस लौटा। अस्पतालों में डॉक्टरों की ह्रदयहीनता का एक सुबूत बृहस्पतिवार रात उस वक्त मिला, जब फैजाबाद से इलाज के लिए आए रेलकर्मी मथुरा प्रसाद पांडेय ऑक्सीजन के लिए तड़पते रहे।
20 दिन पहले उन्हें इलाज के लिए राजधानी लाया गया था और अवध हॉस्पिटल के आईसीयू में एडमिट कराया था, जहां 15 दिन भर्ती रखा गया।
चूंकि, पिताजी रेलवे अस्पताल में इलाज की जिद पर अड़े थे, इसलिए फैजाबाद जाकर उत्तर रेलवे के इंडोर अस्पताल के लिए रेफर करवाया। बृहस्पतिवार शाम पांच बजे फैजाबाद से एंबुलेंस में उन्हें लेकर निकले और रात नौ बजे अस्पताल पहुंचे।

