‘रजत जयन्ती समारोह’ के जरिए महागठबंधन की जमीन तैयार करने की कोशिश
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समारोह में बिहार के मुख्यमंत्री और जद (यू) अध्यक्ष नीतिश कुमार के आने पर संशय बरकरार है। जद (यू) सूत्रों के अनुसार बिहार में छठ के पर्व की धूम होने की वजह से नीतीश कुमार का समारोह में शामिल होना मुश्किल दिख रहा है। समारोह में इन नेताओं के जमावड़े के बीच कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर ने अपनी पार्टी को बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की अपेक्षा समाजवादी पार्टी (सपा) की विचारधारा के नजदीक बताकर महागठबन्धन को लेकर सकारात्मक संदेश दिया है।
सपा में महागठबन्धन का विरोध कर रहे मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी अपनी विकास यात्रा के दौरान इसे लेकर पार्टी अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव के विचारों से अपने को सहमत बताया। मुलायम सिंह यादव गठबन्धन के पक्षधर हैं और उन्हीं की पहल पर ही सपा के प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ने गठबन्धन के संभावित सहयोगियों से मुलाकात की जबकि कांग्रेस के चुनावी रणनीतिकार प्रशान्त किशोर उर्फ पीके ने सपा अध्यक्ष से दिल्ली में इस संबंध में बातचीत की।
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर ने कहा कि हाल ही में प्रशांत किशोर और सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव के बीच बैठक जरूर हुयी थी मगर इसमें गठबंधन के बारे में कोई चर्चा नही हुयी। यह एक निजी मुलाकात थी। पार्टी हाईकमान ने अब तक किसी को इस मसले में बात करने की अधिकृत नही किया है। राज्यसभा सदस्य ने कहा ‘हम देश में धर्मनिरपेक्षता को लेकर संजीदा हैं। धर्मनिरपेक्ष दलों की एकता जरूरी है और इसके लिये हमें मिलजुल कर काम करना होगा। धर्मनिरपेक्षता के मसले पर सपा अगर आवाज बुलंद करती है तो उसका स्वागत किया जाना चाहिये।’ महागठबन्धन की संभावनाओं के बीच कल लखनऊ के जनेश्वर मिश्र पार्क में आयोजित रजत जयन्ती समारोह की तैयारियां चरम पर है। महानगर को लाल-हरे झंडे, बैनरों से पाट दिया गया है। विकास यात्रा की तर्ज पर समारोह में भी यादव परिवार में सब कुछ ठीक ठाक है, यह दिखाने की पुरजोर कोशिश की जा रही है।
इस बीच, सपा प्रदेश अध्यक्ष ने बताया कि समारोह में शामिल होने के लिए देश के कोने-कोने से कार्यकर्ताओं का हुजूम यहां पहुंच रहा है। सभी के ठहरने और खाने का इंतजाम किया गया है। समारोह की शुरुआत पार्टी अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव द्वारा दीप प्रज्जवलित कर किया जायेगा। समारोह में पार्टी के 25 वर्षों के संघर्षों पर विस्तार से प्रकाश डाला जायेगा। पांच नवंबर 1992 को बनी सपा अब तक चार बार उत्तर प्रदेश में सत्तारुढ़ हो चुकी है।
